खेल

पीएचसी सिरसिदा वैक्सीन वितरण केंद्र से लाई गई वैक्सीन को गोरकापार में अस्पताल तक पहुंचाने के बजाय साईं किराना दुकान के सामने सड़क किनारे छोड़ दिया गया।

धूप में तड़पती वैक्सीन, बेपरवाह स्वास्थ्य तंत्र मासूमों की जिंदगी से खिलवाड़ का शर्मनाक नमूना

 

संपादक:- मीनू साहू

बालोद :- छत्तीसगढ़ के बालोद जिला में शासन एक ओर शून्य से पांच वर्ष तक के बच्चों को गंभीर बीमारियों से बचाने के लिए टीकाकरण और पल्स पोलियो जैसे अभियान पर करोड़ों रुपये खर्च कर रहा है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर सामने आई लापरवाही पूरे स्वास्थ्य तंत्र की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। गुण्डरदेही अंतर्गत मिनी पीएचसी सिरसिदा वैक्सीन वितरण केंद्र से लाई गई वैक्सीन को गोरकापार में अस्पताल तक पहुंचाने के बजाय साईं किराना दुकान के सामने सड़क किनारे छोड़ दिया गया। बताया जा रहा है कि गोरकापार, सकरौद, पांगरी और खपरी क्षेत्र के वैक्सीन बॉक्स वहीं रखकर वाहन चालक रवाना हो गया।

सबसे हैरानी की बात यह है कि गोरकापार में स्वास्थ्य केंद्र उपलब्ध होने के बावजूद जीवनरक्षक वैक्सीन को सुरक्षित स्थान पर रखने की बजाय खुले स्थान पर छोड़ना घोर गैरजिम्मेदारी माना जा रहा है। यदि वैक्सीन लंबे समय तक धूप या निर्धारित तापमान से बाहर रही हो, तो उसकी गुणवत्ता और प्रभावशीलता प्रभावित होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति इतनी गंभीर लापरवाही किसके संरक्षण में हो रही है?

स्वास्थ्य विभाग लगातार कोल्ड चेन बनाए रखने के दावे करता है, लेकिन इस तरह की घटना उन दावों की सच्चाई उजागर करती दिखाई देती है। जिन दवाओं को विशेष तापमान में सुरक्षित रखना अनिवार्य होता है, उन्हें सड़क किनारे छोड़ देना प्रशासनिक संवेदनहीनता और कार्यप्रणाली की बड़ी विफलता माना जा रहा है।

स्थानीय लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते ऐसी लापरवाहियों पर अंकुश नहीं लगाया गया, तो सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर जनता का विश्वास लगातार कमजोर होता जाएगा। मासूम बच्चों की जिंदगी से जुड़े मामलों में इस तरह की उदासीनता किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकती।

Related Articles

Back to top button